Saturday, 3 May 2014

kushwah ki shayri: हर एक चेहरे को ज़ख्मों का आईना ना कहो ये ज़िन्दग...

kushwah ki shayri: हर एक चेहरे को ज़ख्मों का आईना ना कहो
ये ज़िन्दग...
: हर एक चेहरे को ज़ख्मों का आईना ना कहो ये ज़िन्दगी तो है रहमत इसे सज़ा ना कहो ना जाने कौन सी मजबूरियों का कैदी हो वो साथ छोड़ गया है तो ...

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