kushwah ki shayri: हर एक चेहरे को ज़ख्मों का आईना ना कहो
ये ज़िन्दग...: हर एक चेहरे को ज़ख्मों का आईना ना कहो ये ज़िन्दगी तो है रहमत इसे सज़ा ना कहो ना जाने कौन सी मजबूरियों का कैदी हो वो साथ छोड़ गया है तो ...
एहसास की शायरी
Saturday, 3 May 2014
हर एक चेहरे को ज़ख्मों का आईना ना कहो
ये ज़िन्दगी तो है रहमत इसे सज़ा ना कहो
ना जाने कौन सी मजबूरियों का कैदी हो
वो साथ छोड़ गया है तो बेवफा ना कहो
तमाम शहर ने नेजों पर क्यूँ है उछाला मुझे
ये इत्तेफाक था तुम इसे हादसा ना कहो
ये और बात के दुश्मन हुआ है आज मगर
वो मेरा दोस्त था कल तक उसे बुरा ना कहो
हमारे ऐब हमें उँगलियों पे गिनवाओ
हमारी पीठ के पीछे हमें बुरा ना कहो
मैं वाकियात की ज़ंजीर का नहीं कायल
मुझे भी अपने गुनाहों का सिलसिला ना कहो
ये शहर वो है जहाँ राक्षस भी हैं 'कन्नौजी'
हर एक तराशे हुए बुत को देवता ना कहो
ये ज़िन्दगी तो है रहमत इसे सज़ा ना कहो
ना जाने कौन सी मजबूरियों का कैदी हो
वो साथ छोड़ गया है तो बेवफा ना कहो
तमाम शहर ने नेजों पर क्यूँ है उछाला मुझे
ये इत्तेफाक था तुम इसे हादसा ना कहो
ये और बात के दुश्मन हुआ है आज मगर
वो मेरा दोस्त था कल तक उसे बुरा ना कहो
हमारे ऐब हमें उँगलियों पे गिनवाओ
हमारी पीठ के पीछे हमें बुरा ना कहो
मैं वाकियात की ज़ंजीर का नहीं कायल
मुझे भी अपने गुनाहों का सिलसिला ना कहो
ये शहर वो है जहाँ राक्षस भी हैं 'कन्नौजी'
हर एक तराशे हुए बुत को देवता ना कहो
Wednesday, 23 April 2014
Wednesday, 28 August 2013
kushwah ki shayari
Karo Bade Shauk Se Mohabbat. Ae Chahne Waloon!!!!
Magar Soch Lena Kisi Kaam Ke,Na Rahoge Bichadd Jaane Ke Baad.!
Magar Soch Lena Kisi Kaam Ke,Na Rahoge Bichadd Jaane Ke Baad.!
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